लंग कैंसर कैसे ठीक होता है?HealthPlanet

Posted on Mon 19th Dec 2022 : 11:55

क्या होता है Lung Cancer, क्या रहती है इसके ठीक होने की स्थिति

शिशु में श्वसन संकट सिंड्रोम (आरडीएस) होता है, जिसमें फेफड़ों की खराबी के कारण शिशु को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है.
क्या होता है लंग कैंसर
अमेरिका की सीडीसी के मुताबिक सरलतम रूप में हम कैंसर हमारे शरीर में कोशिकाओं के निर्माण का अनियंत्रित होने की स्थिति को कहते हैं. जब यह कैंसर फेफड़ों में होता है तो उसे फेफड़ों का कैंसर या लंग कैंसर कहते हैं.

कोशिकाओं का फैलना
कैंसर की अगली स्थिति में यह नियंत्रित कोशिकाओं का निर्माण एक अंग से दूसरे अंग में चला जाता है. यह फेफड़ों से लिम्फ नोड या दिमाग जैसे दूसरे अंगों तक में फैल सकता है. वहीं दूसरे अंगों से फेफड़ों में भी आ सकता है. इस स्थिति को मेटास्टेसिस कहते हैं. आमतौर पर डॉकटर्स कैंसर की तीन स्टेज या स्थितियों की बात करते हैं.

क्या होती है पहली स्टेज
पहली स्टेज में कैंसर के अवांछनीय कोशिकाओं का निर्माण केवल एक अंग तक ही सीमित होता है. लेकिन इस अवस्था में भी से कोशिकाएं तेजी से बढ़ती हैं. बताया जाता है कि इस अवस्था में मरीज का इलाज आसान होता है और प्रभावित अंग का कैंसर कोशिकाओं से पीड़ित वाला हिस्सा निकाल कर इलाज संभव है जिसके बाद मरीज के पूरी तरह से ठीक होने की संभावना होती है.



दूसरी स्टेज में होता यह
दूसरी स्टेज या अवस्था में मरीज मेटास्टेट की स्थिति में आ जाता है यानी कैंसर की कोशिकाएं दूसरे अंगों में फैलने लगती हैं. ऐसी अवस्था में कीमोथैरेपी, रेडियोथैरेपी के साथ ऑपरेशन जरूरी हो जाता है.

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एडवांस स्टेज खड़ी करती है मुश्किलें
एडवांस स्टेज या अंतिम अवस्था में कैंसर कोशिकाएं शरीर के और ज्यादा हिस्सों में फैलने लगता है और ऐसे में मरीज का इलाज मुश्किल हो जाता है. इसमें उसके बचने की संभावना कम होने लगती है. लेकिन इसका इलाज काफी लंबा चल सकता है.

तीसरे स्टेज का लंग कैंसर है संजय दत्त को
बताया जा रहा है कि संजय दत्त को तीसरी स्टेज का लंग कैंसर है. यह सभी को काफी हैरान कर रहा है क्योंकि कई बार इस स्थिति तक आने से पहले ही कैंसर का पता चल जाता है, खास तौर पर संजय दत्त जैसे लोगों के मामले में जो स्वास्थ्य सुविधाओं के नजदीक हों. लेकिन कई डॉक्टर्स का कहना है कि आमतौर पर कैंसर की स्थिति का काफी बाद में ही पता चलता है.

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लंग कैंसर का सबसे अधिक खतरा धूम्रपान करने वालों को होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कैसे पता लगाया जाता है कि यह बीमारी है
इस बीमरी के निदान यानी डायग्नोसिस के बारे में तीन चीजें अहम हैं. ट्यूमर, नोड और मेटास्टेसिस. इसमें ट्यूमर कितना बड़ा है और कहां है, यह लिम्फ नोड के कितने पास है या वहां तक पहुंचा है या नहीं, और यह दूसरे अंगों में फैलना शुरू हो चुका है या नहीं, ये बातें उसकी अवस्था और गंभीरता के बारे में तय करने में मददगार होती हैं. एक्स रे में संदेह होने पर ही डॉक्टर लंग कैंसर के लिए आगे पड़ताल के लिए जाते हैं. अगर मरीज आदतन सिगरेट पीने वाला हो तो वे इस बात को गंभीरता से लेते हैं. इसके बाद टोमोग्राफी जिसे सीटी कहते हैं, पीईटी, एमआरआई और बोन स्कैन जैसे कोई टेस्ट करवाया जा सकता है. कई बार डॉक्टर्स खराब हिस्से को निकाल कर बायोप्सी की जांच के लिए भी लैब में भिजवा देते हैं.

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क्या है इसका इलाज
इस बीमारी का इलाज बीमारी की अवस्था या स्टेज पर भी काफी कुछ निर्भर करता है. शुरुआती स्थितियों में केवल ऑपरेशन ही काफी होता है, लेकिन कई बार मामले की जटिलता के कारण कीमोथैरेपी दूसरे स्टेज से ही शुरू कर दी जाती है. तीसरे स्टेज में रेडियोथैरेपी का भी सहयोग लिया जाता है. इसके बाद की स्थिति में सभी विकल्पों के साथ इन्यूनोथैरेपी भी शामिल हो जाती है. यहां तक आते आते मरीज की हालत काफी बिगड़ चुकी होती है.

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